Shanghai Cooperation Organisation - SCO

Shanghai Cooperation Organisation – SCO

हाल ही में भारत सरकार के केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation – SCO) के सभी सदस्य देशों के बीच “मास मीडिया के क्षेत्र में सहयोग” के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर और अनुमोदन को मंजूरी दी है। Shanghai Cooperation Organisation – SCO एक यूरेशियन राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संगठन है। Shanghai Cooperation Organisation – SCO में आठ सदस्य देश हैं,- रूस, भारत, कजाकिस्तान, चीन, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज़्बेकिस्तान और किर्गिस्तान हैं। इसके अतिरिक्त, इस संगठन के चार पर्यवेक्षक और छह संवाद सहयोगी सदस्य देश भी हैं।

SCO & Mass Media Agreement
SCO & Mass Media Agreement

Shanghai Cooperation Organisation – SCO (Mass media Agreement)

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शंघाई सहयोग संगठन के सभी सदस्य देशों के बीच ”मास मीडिया के क्षेत्र में सहयोग” के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर और अनुमोदन हेतु अपनी कार्योत्तर मंजूरी दे दी है।
  • उल्लेखनीय है कि इस समझौते पर जून, 2019 में हस्ताक्षर किए गए थे।
  • यह समझौता मास मीडिया के क्षेत्र में सदस्य देशों के बीच समान और पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग को बढ़ावा देगा। प्रत्येक पक्ष पारस्परिकता के आधार पर गतिविधियों को सुगम बनाएगा जिससे समानता सुनिश्चित हो सके।
  • यह समझौता सदस्य देशों को मास मीडिया के क्षेत्र में सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों और नवीन नवाचारों को साझा करने का अवसर प्रदान करेगा।

Shanghai Cooperation Organisation – SCO

How will the Agreement on ‘Cooperation in the field of Mass Media’ benefit?

  • The Agreement on ‘Cooperation in the field of Mass Media’ between all the Member States of Shangai Cooperation Organization will provide an opportunity for the Member States to share new innovations and best practices in the field of Mass Media.
  • Boost equal and mutually beneficial cooperation between associations in the field of Mass Media.
  • Creation of a favorable system for mutual and wide distribution of information via Mass Media in a bid to deepen the knowledge about the lives of the people of their States,
  • Increasing cooperation among the Editorial Offices of the Mass Media of their States as well as between the relevant Ministries, Agencies, and Organizations in the field of Mass Media,
  • Promoting equal and mutually beneficial cooperation between professional associations of journalists of the States,
  • Aiding broadcast of television and radio programs distributed legally within the territory of the State, legal broadcasting of materials and information by Editorial Offices,
  • Encouraging the exchange of specialists and experience in the field of Mass Media, offer mutual assistance in training media professionals, and promote cooperation between scientific research and educational institutions in the field of Mass Media.

Shanghai Cooperation Organisation – SCO

  • 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद ये संगठन अस्तित्व में आया था। 1996 में बना ये संगठन पहले शंघाई – 5 के नाम से जाना जाता था, जिसमें चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस और ताजिकिस्तान जैसे देश शामिल थे।
  • 2001 में इस संगठन का विस्तार हुआ और उज्बेकिस्तान भी इस संगठन में शामिल हो गया। उज्बेकिस्तान के इस संगठन में शामिल होने के बाद 15 जून, 2001 को शंघाई में SCO संगठन की स्थापना हुई थी।
  • शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation-SCO), एक यूरेशियन राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संगठन है।
  • वर्तमान में इस संगठन में आठ सदस्य देश हैं, यथा- रूस, भारत, कजाकिस्तान, चीन, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज़्बेकिस्तान और किर्गिस्तान हैं। इसके अतिरिक्त, इस संगठन के चार पर्यवेक्षक और छह संवाद सहयोगी सदस्य देश भी हैं।
  • गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान को 2017 में शंघाई सहयोग संगठन के पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल किया गया था।
  • शंघाई सहयोग संगठन का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय ‘सदस्य देशों के राष्ट्रप्रमुखों की परिषद’ है। इस परिषद की वार्षिक बैठक में सदस्य देशों के प्रमुख हिस्सा लेते हैं।
  • SCO एससीओ का उद्देश्य क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा को बनाए रखना है।
  • आर्कटिक महासागर से हिन्द महासागर और प्रशांत महासागर से लेकर बाल्टिक सागर तक फैली दुनिया की करीब 44 प्रतिशत आबादी एससीओ में शामिल देशों के अंतर्गत आती है।

भारत के लिये क्यों अहम है SCO?

  • SCO की सदस्यता भारत को संपूर्ण एशिया की एक प्रमुख शक्ति के रूप में स्थापित करती है जबकि पहले भारत की प्रतिष्ठा केवल दक्षिण एशिया तक ही सीमित थी।
  • SCO मौजूदा वक़्त में भौगोलिक क्षेत्र और जनसँख्या के आधार पर दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्रीय संगठन है।
  • भारत इस मंच के ज़रिए मध्य एशिया में सक्रिय भूमिका निभा सकता है।
  • भारत SCO के ज़रिए ईस्ट और वेस्ट के बीच संतुलन स्थापित कर सकता है।
  • SCO के संदर्भ में भारत के दो महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं- पहला आतंकवाद और दूसरा कनेक्टिविटी। भारत के ये दोनों ही उद्देश्य SCO के मूल मन्त्र से मेल खाते हैं।
  • भारत SCO के ताशकंद स्थित आतंकवाद-रोधी निकाय (रीजनल एंटी टेरर स्ट्रक्चर -RATS) से खुफिया तंत्र और इंटेलिजेंस तक पहुंच चाहता है।
  • भारत की कनेक्ट सेंट्रल एशिया पॉलिसी के लिए कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण है। मध्य एशिया में भारत के हितों में सर्वोपरि ऊर्जा सहयोग है और यह चीन के पड़ोस में स्थित है।
  • चीन SCO के ज़रिए इस क्षेत्र में अपने रणनीतिक मक़सदों को पूरा करना चाहता है। भारत भी इस संगठन के ज़रिए पाकिस्तान पर दबाव बना सकता है।
  • SCO के कई देश प्राकृतिक गैस और तेल भंडार वाले देश हैं। भारत इन देशों के साथ बेहतर सम्बन्ध बना कर अपने हितों को साध सकता है।
  • SCO के ज़रिए भारत मादक पदार्थों की तस्करी, छोटे हथियारों के प्रसार और आतंकवाद व कट्टरतावाद जैसे समस्याओं से निपटने का प्रयास कर सकता है।
  • लंबे समय से अधर में पड़ी तापी (तुर्कमेनिस्तान-अफग़ानिस्तान-पाकिस्तान- भारत) पाइपलाइन और IPI (ईरान-पाकिस्तान-भारत) पाइपलाइन जैसी परियोजनाओं पर SCO के ज़रिए बात आगे बढ़ सकती है।
  • सार्क के नाक़ाम होने के बाद SCO संगठन भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है। क्योंकि पाकिस्तान भी इसका सदस्य है। SCO चीन और पाकिस्तान जैसे प्रतिद्वंद्वियों के साथ जुड़ने के लिए एक साझा मंच प्रदान करता है।

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